आलसाई भोर, ढलती साँझ की तरह
जीवन, एक दिवस की तरह !
जेठ की दोपहरी सा तपता
शीत सा ठिठुरता है जीवन,
पतझङ सा झरता
बरफ सा पिघलता,
कभी धूप, कभी झांव की तरह
जीवन, एक दिवस की तरह !
पूरणमासी सा चमकीला
अमावस सा अंधियारा,
धूमकेतू और तारों सा टिमटिमाता है जीवन,
क्षणभंगुर सा, बुलबुले की तरह
जीवन, एक दिवस की तरह !
बादलों सी गरजन,
बीजली की सी कङ़कन
धुंध सा धुंधला,धनुक का सा सतरंगी
कभी सूखे, कभी पावस की तरह
जीवन, एक दिवस की तरह !

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